- उज्जैन में त्योहारों से पहले पुलिस का फ्लैग मार्च, टावर चौक से नीलगंगा तक निकला मार्च; होली, रंगपंचमी और रमजान के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
- महाकाल में तड़के भस्म आरती, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट: पंचामृत अभिषेक, रजत मुकुट-त्रिपुण्ड से दिव्य श्रृंगार; “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजा मंदिर
- उज्जैन में मंदिर क्षेत्र के पास युवक से मारपीट: युवती के साथ होटल जा रहा था, बजरंग दल ने रोका; मोबाइल में अश्लील फोटो-वीडियो होने का आरोप, पुलिस ने जब्त किया फोन
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट: रजत मुकुट, त्रिपुण्ड और पुष्पमालाओं से सजे बाबा, “जय श्री महाकाल” से गूंजा परिसर
- एमपी बजट 2026-27: सिंहस्थ के लिए 13,851 करोड़ का प्रस्ताव, उज्जैन में 3,060 करोड़ के नए विकास कार्य; 4.38 लाख करोड़ के कुल बजट में सिंहस्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस
57/84 श्री घंटेश्वर महादेव
57/84 श्री घंटेश्वर महादेव
भगवान शंकर ने पार्वती को कथा सुनाते हुए बताया कि गणों में सबसे प्रिय गण घंटा नाम का गण है। देवताओं के संगीत सभागृह में इच्छा से शामिल होने के लिए चतुर गंधर्वों में श्रेष्ठ चित्रसेन से मिले और सभा में शामिल होने का उपाय पूछा। उपाय बताने से पूर्व चित्रसेन ने गण की परीक्षा ली और संगीत सुनाने को कहा। गण से संगीत सुनने के बाद चित्रसेन प्रसन्न हुए और सभा में जाने की आज्ञा दे दी। थोडी देर के बाद वहां भगवान शंकर का द्वारपाल आया और गण से कहा कि तुम महादेव को छोड़कर यहाँ बैठे हो। तुम्हें ब्रम्हा की सभा में जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। इतना सुन कर गण दूर जाकर बैठ गया। इसी प्रकार सोच विचार करते हुए एक वर्ष बीत गया परन्तु ब्रम्हा की सभा में जाना नहीं हुआ। इतने में ही उसने वीणा हाथ में लिये नारद जी को ब्रम्हा की सभा में जाते हुए देखा। उन्हें देखकर गण ने कहा हे नारद मुनि आप ब्रम्हा जी को मेरे आने की सूचना करो। यह सुनकर नारद जी ने कहा हे गण ब्रम्हा ने मुझे जरूरी कार्य के लिए देवाचार्य ब्रहस्पति के पास भेजा है, मैं उनसे मिल कर आता हूँ और उन्होने भगवान शंकर को सारी बातें बताईं। यह बात सुनकर षिव जी को गुस्सा आ गया। उन्होनें श्राप देते हुए गण से कहा कि तू पृथ्वी पर गिर पड़ेगा। श्राप युक्त होकर गण पृथ्वी पर देवदारू वन में गिर पड़ा। भगवान षिव ने कहा जो व्यक्ति अपने स्वामी को छोड़कर दूसरे की सेवा करेगा वह इसी प्रकार नर्क में जायेगा। देवदारू वन में गण को तपस्या करते हुए कुछ ऋषि मुनि मिले। गण ने विलाप करते हुए बताया कि नारद मुनि ने मेरे साथ छल किया है। अब मैं दोनों स्थानों से गया। गण का पश्चाताप देखकर भगवान शिव ने कहा तुम महाकाल वन में चले जाओ वहां रेवन्तेष्वर के पष्चिम में उत्तम लिंग है। तुम इस लिंग की पूजा करो यह लिंग तुम्हे सुख समृद्धि देगा और भविष्य में यह लिंग घण्टेष्वर के नाम से जाना जायेगा। मान्यता है कि जो भी मनुष्य घंटेष्वर का दर्षन और पूजन करेगा उसे संगीत की सभी विधाओं का ज्ञान मिलेगा।